Tuesday, May 3, 2011

नदिया की एक धार बहा दे

गुरुदेव के आशीर्वाद से -

नदिया की एक धार बहा दें
बारिश की बूँदें छिटका दें

आओ रिश्तों की सीलन को
उलटे-पलटें धूप दिखा दें

आंखें तरसें जिन मंजर को
खोयी नज़रों से मिलवा दें

छेड़ें कोई तान भली सी
कोई अच्छा राग सुना दें

बुझी हुई सी जो लगती हैं
हम उन साँसों को सुलगा दें

जो चेहरे हैं खोये-खोये
उनपर एक मुस्कान जगा दें

जिन आँखों में आँसू दिक्खें
उनमें थोड़ी चमक जगा दें

सूरज गर छिप कर बैठा है
काट अँधेरा उसको ला दें

जैसे बोले छम से घुंघुरू
एक हँसी ऐसी बिखरा दें

मिलकर खोजें ऐसा कुछ हम
एक नया जीवन हम पा लें

5 comments:

  1. oh garmi ka varnan! waaah waaaaah.....nicely written! Abhi ek do words ka meaning tere se poochoongi thodi der mein! LOL....I wish tere yeh words such ho jaaye! good good...keep up the good word 'behen'! :D

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  2. आओ रिश्तों की सीलन को
    उलटे-पलटें धूप दिखा दें

    जैसे बोले छम से घुंघुरू
    एक हँसी ऐसी बिखरा दें

    वाह...वाह...वाह...बहुत ही अच्छी रचना है...मेरी बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  3. नीरज जी: ब्लॉग पर आने एवं टिपण्णी के लिए धन्यवाद.
    यह कविता गुरुदेव के आशीर्वाद स्वरूप हैं, उनके निमित्त आभार प्रकट करते हैं.

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  4. अब आपकी जिम्मेदारियां बढ़ गईं. अपने आप कविता लेखन को एक स्तर मिल जाएगा.

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